छत्तीसगढ़ का परिचय Introduction of chhattisgarh

छत्तीसगढ़ का परिचय (2000) | राज्य का क्षेत्रफल | राज्यसभा एवं लोकसभा | जनगणना | छत्तीसगढ़ राज्य की माँग | भौगोलिक विस्तार | राज्य में सम्भाग | भारत की स्वतन्त्रता से पूर्व |
छत्तीसगढ़ का परिचय
‘धान का कटोरा’ कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ राज्य मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के द्वारा भारत के हृदय प्रदेश (मध्य प्रदेश) से पृथक् होकर भारत के 26वें राज्य के रूप में 1 नवम्बर, 2000 को गठित किया गया, नवगठित राज्य का आकार समुद्री घोड़े की तरह दिखता है।

गठन के समय 16 जिले, 3 सम्भाग 98 तहसीलें थीं। छत्तीसगढ़ राज्य मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्व में 17°46 उत्तरी अक्षांश से 24°5 उत्तरी अक्षांश तथा 80°15 पूर्वी देशान्तर से 84°20 पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है।

जिसका भौगोलिक क्षेत्रफल 135194 वर्ग किमी है। जो क्षेत्रफल की दृष्टि से 10वाँ सबसे बड़ा राज्य है और देश के कुल क्षेत्रफल का 4.11% है।



राज्य का क्षेत्रफल

पंजाब, हरियाणा तथा केरल के क्षेत्रफल के योग से अधिक है तथा इसके बस्तर सम्भाग का क्षेत्रफल केरल के क्षेत्रफल से अधिक है। छत्तीसगढ़ राज्य का क्षेत्रफल देश के 16 राज्यों के क्षेत्रफल से अधिक है। राज्य की उत्तर से दक्षिण तक लम्बाई 650 किमी तथा पूर्व से पश्चिम की चौड़ाई 435 किमी है।



राज्यसभा एवं लोकसभा


नवगठित राज्य में राज्यसभा के लिए 5 स्थान, लोकसभा के लिए 11 स्थान तथा राज्य की एक सदनीय विधायिका (विधानसभा के लिए 90 स्थान निर्धारित हैं।

राज्य के प्रथम राज्य पाल के रूप में दिनेश नन्दन सहाय तथा प्रथम मुख्य मन्त्री के रूप में अजीत जोगी को नियुक्त किया गया तथा राज्य में बनने वाली पहली सरकार कांग्रेस पार्टी की थी, वर्तमान में राज्य 4 सम्भाग, 27 जिलों और 149 तहसीलों में विभक्त है।

एवं राज्य की सीमा 6 राज्यों (उत्तर में उत्तर प्रदेश एवं झारखण्ड, पूर्व में ओडिशा, दक्षिण में आन्ध्र प्रदेश, पश्चिम में महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश) से मिलती है। कर्क रेखा राज्य के उत्तरी भाग से होकर गुजरती है।

जनगणना


वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या 25540196 है। जो देश की कुल जनसंख्या के 2.11% है। अतः जनसंख्या की दृष्टि से राज्य का देश में 16वाँ स्थान है।



छत्तीसगढ़ राज्य की माँग


पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की माँग सर्वप्रथम वर्ष 1924 में रायपुर जिला परिषद् ने की जिसमें छत्तीसगढ़ को एक पृथक राज्य के रूप में मान्यता देने की माँग की गई।

इसके बाद कांग्रेस के वर्ष 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग उठाई गई, स्वतन्त्रता के पश्चात् वर्ष 1948 ई. में तीसगढ़ की 14 देशी रियासतों को मध्य प्रान्त में विलीन कर दिया गया और इस प्रकार छत्तीसगढ़ पुराने मध्य प्रदेश तथा 1 नवम्बर, 1956 से नए मध्य प्रदेश का भाग बना।

मध्य प्रान्त की विधानसभा में अलग छत्तीसगढ़ राज्य की माँग रायपुर के विधायक ठा. रामकृष्ण सिंह ने वर्ष 1955 में रखी, तथा वर्ष 1967 में भी राज्य के गठन की माँग की गई इसके बाद वर्ष 1971 में द्वारिकाप्रसाद मिश्र ने छोटे राज्यों के गठन की माँग की, वर्ष 1994 में छत्तीसगढ़ के गठन से सम्बन्धित एक गैर सरकारी विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया गया जो सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया और वर्ष 1998 में राष्ट्रपति के अभिभाषण में छत्तीसगढ़ के गठन के प्रति वचनबद्धता व्यक्त की।

इसके बाद मई, 1998 में मध्य प्रदेश सरकार ने एक विधेयक पारित किया सितम्बर, 1998 में तत्कालीन NDA सरकार ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक राष्ट्रपति के द्वारा राज्य की विधानसभा में रखवाया जिसे विधानसभा ने कुछ संशोधनों के साथ राष्ट्रपति को भेज दिया,

इसके बाद तत्कालीन गृहमन्त्री लालकृष्ण आडवानी ने 25 जुलाई, 2000 को मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम विधेयक 2000 को लोकसभा में रखा जिसे लोकसभा द्वारा 31 जुलाई तथा राज्यसभा द्वारा 9 अगस्त को पारित कर दिया गया एवं इस विधेयक पर राष्ट्रपति के आर नारायण द्वारा स्वीकृति 28 अगस्त 2000 को प्रदान कर दी गई तथा 1 नवम्बर 2000 को नए राज्य छत्तीसगढ़ का गठन कर दिया गया एवं रायपुर इस राज्य की राजधानी बनाई गई।

छत्तीसगढ़ों की संख्या के आधार पर छत्तीसगढ़ नामकरण रतनपुर तथा रायपुर के 18-18 गढ़ों के मिलने से पन्द्रहवीं शताब्दी में हुआ। इससे पूर्व इसे दण्डकारण्य तथा दक्षिण कोसल कहा जाता था।


भौगोलिक विस्तार


छत्तीसगढ़ के भौगोलिक विस्तार में कई असमानताएँ विद्यमान है। इसके उत्तरी भाग में कोरिया, सरगुजा तथा जशपुर जिलों में पर्वतमालाओं एवं पठार का विस्तार है। मैकाल पर्वत श्रेणी कवर्धा जिले में दक्षिण-पूर्व तक विस्तृत है।

पूर्वी भाग में सक्ती पर्वत लगभग महानदी कछार तक फैला है। रायगढ़ जिला छोटानागपुर पठार का पश्चिमी छोर है। रायपुर जिला महानदी के ऊपरी कछार और पूर्वी सीमा पर पहाड़ी मैदान में विभक्त है। दुर्ग और राजनांदगाँव छत्तीसगढ़ मैदान और मैकाल श्रेणी में विभक्त है। बस्तर का अधिकांश भाग पठारी एवं पहाड़ी है, जिसकी समुद्रतल से औसत ऊँचाई 600 मी है।



राज्य में सम्भाग


छत्तीसगढ़ राज्य में चार सम्भागः बिलासपुर, रायपुर, बस्तर तथा सरगुजा हैं। बस्तर राज्य का सबसे बड़ा सम्भाग है। ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से अपनी एक अलग पहचान लिए छत्तीसगढ़ एक स्वतन्त्र सामाजिक-सांस्कृतिक इकाई रह गया है, हालाँकि झारखण्ड तथा दण्डकारण्य की भी अलग पहचान शताब्दियों तक थी।

भारत की स्वतन्त्रता से पूर्व


भारत की स्वतन्त्रता से पूर्व छत्तीसगढ़ चौदह रियासतों (बस्तर, काँकेर, राजनांदगाँव, खैरागढ़, छुईखदान, कवर्धा रायगढ़, सक्ती, सारंगगढ़ सरगुजा, उदयपुर, जशपुर, कोरिया, चांगभखार) के छत्तीसगढ़ सम्भाग से विभाजित था, जो सेण्ट्रल प्राविन्सेज का एक घटक था। ब्रिटिशों के सीधे आधिपत्य के क्षेत्र (रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग आदि) को ‘खालसा’ कहा जाता था,

जिसका मुख्यालय रायपुर में था। एक सौ पचास वर्षों के ब्रिटिश शासन के कारण छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विखण्डन के साथ आर्थिक विपन्नता भी आई।

ब्रिटिश सरकार के खिलाफ यहाँ की जनता ने सर्वप्रथम 1774 ई. में विद्रोह किया था, जो अंग्रेजों के खिलाफ भारत का पहला विद्रोह था।

छत्तीसगढ़ भारत का एक राज्य है इसका गठन 1 नवंबर सन 2000 को हुआ था और यह भारत का 26 वां राज्य है पहले यह मध्य प्रदेश के अंतर्गत आता था डॉ हीरालाल के मतानुसार छत्तीसगढ़ चेदीशगढ़ का अब अंश हो सकता है किसी समय क्षेत्र में छत्तीसगढ़ थे इसलिए इसका नाम छत्तीसगढ़ पड़ा

History of Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कौशल था जो 36 गणों को अपने आप में समाहित रखने के कारण कालांतर में छत्तीसगढ़ बना

छत्तीसगढ़ में मुख्यता दो भाषाएं थी 👉 छत्तीसगढ़ी वैदिक और पौराणिक काल से ही विभिन्न संस्कृतियों के विकास केंद्र रहा है

छत्तीसगढ़ी भाषा👉

छत्तीसगढ़ी भाषा के छत्तीसगढ़ राज्य में बोले जाने वाली एक अत्यंत मधुर एवं स्वरस भाषा है यह हिंदी के अत्यंत निकट है और इसकी लिपि देवनागरी है छत्तीसगढ़ी का अपना समृद्ध साहित्य व व्याकरण है छत्तीसगढ़ी दो करोड़ लोगों की मातृभाषा है|

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल👉

अंबिकापुर (AMBIKAPUR)👉

अंबिकापुर शहर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का मुख्यालय है इसका नाम हिंदू देवी अंबिका के नाम पर रखा गया जल स्रोतों के अनुसार अंबिकापुर का पुराना नाम बैकुंठपुर था|

सरगुजा जिला अन्य सहारा रायगढ़ महेशपुर कुदरगढ़ भैया धाम मैनपाट तातापानी

अंबिकापुर शहर में महामाया देवी का मंदिर है|

इस मंदिर को काफी मान्यता प्राप्त है हजारों लोग अपनी इच्छाओं को पूरी करने के लिए देवी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं|

राजिम(RAJIM LOCHAN)👉

यह छत्तीसगढ़ का प्रयाग स्थल राजिम रायपुर से 47 किलोमीटर दूरी पर स्थित है |

यह महा नदी के तट पर स्थित है यह पैरी और सोनू नदी महानदी में आकर मिलती है मांग पूर्णिमा प्रतिवर्ष मेला होता है यह भागवत राजिम लोचन का बेहद सुंदर प्राचीन मंदिर है एवं बहुत सारे मंदिरों का समूह भी है जिसका विशेष धार्मिक महत्व है|

गिरौदपुरी धाम(GIROUDPURI DHAM)👉

गिरोधपुरी बलौदा बाजार जिले में स्थित है यह बलौदा बाजार से तकरीबन 50 से 60 किलोमीटर की दूरी पर है जहां बाबा गुरु घासीदास का जन्म हुआ था गिरौदपुरी में छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जय स्तंभ है जो कुतुब मीनार से भी ऊंचा है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं 18 दिसंबर को गुरु घासीदास बाबा का जन्म जयंती मनाया जाता है जिसमें लाखों लोगों की भीड़ गिरौदपुरी धाम उमड़ती है गिरौदपुरी धाम में बहुत सारे धामों का निर्माण किया गया इसमें मुख्यता पंचकुंड छाता पहाड़ जोक नदी मुख्य मंदिर अत्यधिक मनमोहित एवं आनंदित करने वाला दृश्य है आपको इस जगह का एक बार दर्शन अवश्य करना चाहिए

डोंगरगढ़(DONGARGADH)👉

डोंगरगढ़ हावड़ा मुंबई मार्ग पर स्थित है राजनांदगांव से 59 किलोमीटर दूरी पर स्थित है पहाड़ी के ऊपर मां बमलेश्वरी का विशाल मंदिर है नवरात्रि के दिन उपार्जन समूह माता जी के दर्शन के लिए आते हैं इसका निर्माण कामसेन राजा ने किया था

दंतेवाड़ा(DANTEWADA)👉

बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पावन नगरी दंतेवाड़ा है डंकिनी शंखिनी नदी के संगम पर स्थित है यह जगदलपुर से 85 किलोमीटर दूरी पर है इसका निर्माण भागेश्वरी देवी द्वारा कराया गया था

बारसूर(BARSHUR)👉

बारसूर बस्तर के ऐतिहासिक नजरिया बारसूर को नागवंशी राजाओं की राजधानी होने का का गौरव प्राप्त है जगदलपुर गीता के दंतेवाड़ा मार्ग से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित है यह मंदिर मामा भाचा के नाम से प्रसिद्ध है

तुलार(TULAR)👉

अबूझमाड़ के माण क्षेत्र के दो पहाड़ियों के मध्य स्थित शिवलिंग पर हमेशा यह सारे समय स्वच्छ निर्मल जल टपकता रहता है या प्रसिद्ध मंदिर तुलार के नाम से जाना जाता है बारसूर से 42 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

गुप्तेश्वर(GUPTESHWAR)👉

दक्षिण बस्तर में सबरी नदी के किनारे स्थित धरा स्थान पर पुरातात्विक उत्खनन के उपरांत पांचवी और छठी शताब्दी कटचूरी शासन काल की मूर्तियां मंदिर वह बावड़ी आदि मिली तीनों की खुदाई के उपरांत शिव मंदिरों का विशाल समूह मिला

ढोढरेपाल(DHODHREPAL)👉

दरबा विकासखंड में स्थित यह प्राचीन भारतीय मंदिर कला का अद्भुत उदाहरण है चित्र शैली से निर्मित 3 मंदिरों का समूह और अवशेध रह गया है

आरंग(AARANG)👉

रायपुर से संबलपुर जाने वाली राष्ट्रीय राज्य मार्ग 6 पर रायपुर से 86 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है आर्यन एक प्राचीन नगरी है जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है बाघ देवल एवं महामाया मंदिर यहां के पौराणिक मंदिर में से एक है

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